सोमवार, 1 जुलाई 2013

javani divani

मन मत उदास करो
हिम्मत मत छोड़ो
एक दिन आये गा
सब कुछ पा जाओ गे
च्मन्प्र्यास खा कर
सब कुछ कर पाओगे
उन हसीन जवानी के दिन
फिर जरुर लोटे गें
सीटी भी बजने लगेगी
आख्ने भी झपकने लगेंगी
जिस किसी हसीना को देखोगे
वोह भी फसने लगेगी
फिर मन दबी सारी उमंगे
हिचखोले लेंगी
खुद भी खुद
स्विमिंग पूल में उतर जाओगे
खूब dupki लगा
अठखेलिया खेलो 
दूर तक टाइम ले कर
बेफिक्र हो
 रना बनना 
अब उदासी छोड़ो
बुढ़ापे को अगुन्ठा दिखाओ
आगे बढो जवान
जो मन करे
कर लो
जी भर लो
बासी  कढ़ी को
ताजा कर लो 

सोमवार, 13 मई 2013

यू ऱोज -ऱोज
क्यों  बदल जाती  हो
क्या इरादा है
फेसबुक  बदलने का
इस तरह तो
धूप छाव नहीं
बदलती
अब फेसबुक वाले
क्या करे
साइड  छोड़ कर
कभी नहीं जा पाएंगे 

बुधवार, 8 मई 2013


यू ऱोज -ऱोज बदल जाना ठीक नहीं
धूप और छावं की तरह
भटक जायेगी क़ुदरत की  राह
यू क़ुदरत से मत खेलो
 कभी शाम नज़र न  आयेगी
मयखाने खाली हो जायेगे
कहीं पएमाने   नज़र  न  आयेंगे
क्या
ख़ुदा ख़ुद भूल  सुधारने 
जन्नत से आयेगे 

सोमवार, 6 मई 2013

हम कुछ कहना चाहते
पर ओठ सिल जाते
हम कुछ देखना चाहते
पर नज़र झुक जाती
तुम  यू  न  बदलो
मौसम बदल जाते है
हम कुछ कहना चाहते
पर ओठ सिल जाते है
 

बुधवार, 2 जनवरी 2013

हम समझ न पाए
उसकी बेवसी -मजबूरी
वे- वक्त काल के
आगोस में
सो गई
वह अभी ठीक से
खिली न थी
कूर हाथों ने
वजूद खत्म
कर दिया 

मंगलवार, 1 जनवरी 2013

एक "दिया" ने
हमारे जीवन में
नई रोशनी की
किरण ला "दिया"
अब फिर
नई उम्मीद
नया जोस
ला " दिया"
इस "दिया" ने
सब कुछ
दे  "दिया "
हमारे आँगन में
खुशिया भर
"दिया "
खुशिया  भर
"दिया "

शनिवार, 29 दिसंबर 2012

वह  दुःख के सागर में
गोते खाती रही
सरकार मेरी
लोगो को
बातो से  रिझाती रही
अब बातो  और  आश्वासन
से काम नहीं चलेगा
कुछ ठोस कदम
उठाने का वक़्त
आ गया
वह तो सो गई
अब जागने का
वक़्त आ गया