शुक्रवार, 11 मार्च 2011

क्या बताये तैरना
ही नहीं आता
डूब जाऊंगा
इन झील सी
नीली आँखों में

मन बड़ा चचंल
सामने खड़े अंकल
कैसे दीदार हो
दिल में हो रही
बड़ी हलचल

तुम बार-बार
टकरा जाती हो 
सोच समझ कर
सामने आती हो 
सोचा हुआ काम
आता नहीं
मन की बात
मन में रह
जाती है

हिसाब

हमारी उम्र  की बात न करना
तमाम उम्र बीत गयी
हिसाब लगाने में

खुद को याद नहीं
खुदा घर जा पूछना है

 पूछ   कर बताते है
इंतज़ार    करो
आने का
फिर  हिसाब लगाते है

बुधवार, 12 जनवरी 2011

नये जवाने 
की मस्ती हूँ
नहीं  
मै सस्ती हूँ
भाव लगाना
नहीं
नये जवाने  
की मस्ती हूँ
नहीं
मै   सस्ती हूँ
भाव लगाना
नहीं
जान गवाना 
नहीं 
मस्ती में आना
नहीं
जान गवाना
नहीं......

नई जवानी हूँ
बोतल पुरानी हूँ

कल की बात सुनो  
मस्त थी रात सुनो

जाम से जाम लड़ाना
नहीं

नशे में आना
नहीं 

जाम से जाम लड़ाना
नहीं

जान गवाना 
नहीं 

मस्ती में आना 
नहीं........ 

सुबह  जब आँख खुली
राज की  बात खुली
रात की कहानी सुनाना
नहीं 

मस्ती में आना 
नहीं

मटके में नंबर
लगाना
नहीं 

रूपया गवाना
नहीं

मस्ती में आना 
नहीं 

आग का गोला हूँ
मस्त मौला हूँ

आंधी-तूफा हूँ 
बे मौत मरना  
नहीं 

नये जवाने 
की  मस्ती हूँ

नहीं
मै  सस्ती हूँ

भाव लगाना
नहीं

मस्ती में आना 
नहीं 

जान गवाना 
नहीं 

मटके पर  नंबर 
लगाना 
नहीं.....

कलेजा फूंक  
धुआं उड़ना
नहीं   

मस्ती में आना
नहीं

जान गवाना
नहीं

नये जवाने
की मस्ती हूँ

नहीं
मै   सस्ती हूँ

भाव लगाना
नहीं

मस्ती में आना
नहीं

हाथ लगाओगे    
जल जा ओ गे

धुआ- धुआ हो 
जा ओ गे 

शर्त लगाना
नहीं

मस्ती में आना 
नहीं...... 

आना नहीं.......

नये जवाने.......

(अधिकार सुरछित)
कमल मेहरोत्रा    

मंगलवार, 11 जनवरी 2011

मुन्नी बदनाम हुई  
हाथ में  बाम लेकर 

शीला जवान हुई
हाथ में  जाम  लेकर

मै बदनाम हुआ 
दोनों को दाम
दे कर

मुन्नी  बदनाम हुई
हाथ में  बाम लेकर

शीला जवान हुई
हाथ में  जाम लेकर

हाय अब क्या करूं
दोनों को दाम देकर 

शीला की मस्त जवानी 
मुन्नी की हुई बदनामी 

दोनों ने मिल कर 
नास किया 
मैने बरदास किया  
चक्कर में पड़  कर 

मै बदनाम हुआ   
दोनों का साथ  कर

 मुन्नी बदनाम हुई 
हाथ में बाम लेकर 

शीला जवान हुई
हाथ में जाम लेकर
(अधिकार सुरछित है )
कमल मेहरोत्रा 

कन्या का मूल्य

कन्या जब औरत बनती है

धीरे -धीरे समाज के
रूप रंग में ढलती है
बचपन बीता माँ के आँगन में
धीरे से जुम्मेदारी आई जवानी में

इस जुम्मेदारी निभाने को
बचपन बदल जाता है
माँ का आंगन छूट जाता

एक नया रिश्ता बन जाता है
जब एक बेटी माँ बन जाती
तब उसे बचपन याद आता है

माँ ने खून पसीना बहा
उसको इतना बड़ा किया
अब उसे भी
यह जुम्मेदारी निभानी है

माँ की एक -एक बात
उसके कानो में गूंजा करती
तब उनकी बात बेमानी लगती थी

आज उन पुरानी बातो को याद कर
उनका मर्म समझती है
इस स्रष्टि की रचना
कन्या से ही बढती है

जब यह कन्या ही नहीं रहेगी
तब स्रष्टि की रचना कौन करेगा
दुनिया नहीं समझती है

दुनिया नहीं समझती है
यही कन्या का मूल्य है
(अधिकार सुरछित है )
कमल मेहरोत्रा  

बुधवार, 8 दिसंबर 2010

टोपी पुरानी हो गई

टोपी पुरानी हो
गई
चार दिनों में मस्त
जवानी हो गई
वरसे पानी
झम झमा झम
ठंडी हवा की 
दीवानी हो गई
टोपी पुरानी हो
गई
हो हो हो..........
ला ला ला..........
आई सावन की रिर्तु
भडके प्यासी  जवानी 
दिलसमझ न पाया
कब तेरी दीवानी हो
गई 
टोपी पुरानी हो
गई 
हा हा हा.......
ला ला ला.....
माला जप-जप
तेरे नाम की
भरी जवानी में
जेठानी हो गई
टोपी पुरानी हो
गई 
हा -हा -हा -हा 
ला -ला -ला -ला......

गोपाला हे गोपाला

दरवाजा  खुला रखा 
चले आना
नन्द - लाला
चले आना
नन्द -लाला
चले आना 
नन्द - गोपाला 
माखन मिसरी 
भोग लगाऊ
चले आना
रास - बिहारी
चले आना 
गोपाला  
दरवाजा खुला रखा
चले आना
श्यामलाला
गोपीया राह तके
चले आना
रासबिहारी
दरवाजा खुला रखा
चले आना 
मुरली बजय्या
दरवाजा  खुला रखा
चले आना
राधे - गोपाला
मन वेचेन 
सुन
मुरली की धुन
आँखे तरस रही
दर्शन को
गोपाला
दरवाजा खुला रखा
चले आना
मुरली वाला  
अटरिया पर
सेज लगी  
चले आना
शेषनाथा
हमदर्शन के प्यासे 
चले आना
गोपाला 
अरे चले आना
नन्द  लाला 
चले आना
नन्द लाला
राधारानी याद करत 
चले आना 
गोपाला
गोपीया थारी  
राह तकत
चले आना
गोपाला
ग्वाले  राह
चलत 
सुनत
मुरली धुन
सुनत
मुरली धुन  
हो मुरली
बजैया  
दरवाज़ा खुला रखा  
चले आना 
नन्द लाला 
चले आना
नन्द लाला 
गोपीया राह तकत 
चले आओ 
शेष नाथा 
दरवाजा   खुला रखा
चले आना
नन्द लाला 
चले आना
नन्द लाला